गले का कैंसर की पहचान- गले का कैंसर जिसे हम (हेड एंड नेक कैंसर) भी कहते है। इसके लक्षण क्या है ? इससे हम कैसे पहचान सकते है। अगर अभी के समय में आपको ये समस्या चल रही है तो उसे आप कैसे जानेंगे की आपको कैंसर ही है या कोई आम समस्या है, जो किसी भी बिना कारण के हो रही है। तो ऐसे समय में आप कैसे गले के कैंसर को पहचांगे, इसके कारण क्या होते है इसके लक्षण क्या होते है? ये सब जानकारी आज के इस पोस्ट में समझेंगे।

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गले का कैंसर क्यों होता है?/ गले के कैंसर का कारण

  • जो लोग लगातार तम्बाखू या स्मोकिंग (बीड़ी,सिगरेट) जैसे का सेवन करते है ऐसे में लोगो में यह होने के ज़्यादा कारण होते है।
  • अगर कोई मरीज ज़्यादा टोक्सिसं के एक्सपोजर में होता है, क्युकि बहुत से लोग ये कहते है की हम बीड़ी या सिगरेट भी नहीं पीते है और तम्बाखू भी नहीं खाते है। तब भी हमे कैंसर हो सकता है क्या? इसका जवाब ये है की है आपको तब भी कैंसर हो सकता है। और इसलिए होता है क्युकि टोक्सिसं किसी केमिकल के एक्सपोजर में हम लगातार रहते है तो आपको ये समस्या देखने को मिल सकता है। या ये समस्या आपको भी हो सकती है।

गले का कैंसर की पहचान – अगर हम लक्षण की बात करे की क्या क्या लक्षण हमे देखने को मिल सकती है और कैसे हम ये पहचानेंगे की ये गले के कैंसर के लक्षण है।

गले में कैंसर के लक्षण – 

  1. अगर मरीज का लगातार वजन कम होता चला जा रहा है एक महीने में अगर 10 kg भी कम हो जाये तो ऐसे कंडीशन में आपको डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए अगर किसी की टाइट ही कम हो गई है तो ऐसे में ये बात अलग हो जाती है। ऐसे में वजन का कम होना फिर आम बात माना जाता है। जैसे कोई अपने खाने पिने में पर्यात भोजन न ले रहा हो तो ऐसे में वजन का कम होना आम समस्या है। लेकिन उस मरीज को गले से रिलेटेड किसी तरह की समस्या है जैसे गले में लगातार दर्द रहना, एकदम से मरीज की आवाज बदल जाना, एकदम से वजन का कम हो जाना, मुँह से खून का आना, मरीज को मुँह में बार बार छाले हो जाना, जो की नार्मल दवाइयों से ठीक भी नहीं होते, इन दवाइयों को मरीज कितना भी खा ले पर कोई आराम नहीं होता है।
  2. खाना खाने के समय या पानी पीते समय उस मरीज को किसी प्रकार की दिक्कत होना या दर्द का होना, पहले मरीज को लिक्विड भोजन खाने से कोई परेशानी नहीं होती है। पर सॉलिड खाना खाने से समस्या होती है। पर कुछ दिन बाद ये समस्या जब बढ़ जाती है तो पानी पीते समय भी गले में दर्द होता है।
  3. इसके अलावा अगर मरीज की आवाज लगातार बदल रही है तो ऐसे में अपने डॉक्टर से मिल कर सलाह लेना चाहिए। क्युकि लेरिंग्स का कैंसर होने का खतरा ज़्यादा रहता है।
  4. इसके अलावा मरीज के गले के आस पास जो लिंगफ्लूड होते है उनमे सूजन हो जाती है। तो ऐसे समय में ये जो लक्षण है जिनकी वजह से हम पहचान सकते है की हमे गले का कैंसर है या कोई आम समस्या है।

मरीज के लिए ज़रूरी सलाह –

जब खाना खाते है तो गले में अटकता है या फस रहा है अगर ऐसे लग रहा है या एक ही लक्षण नहीं है कई बार हमे सुनाई कम देना भी लगता है या ऐसा महसूस होता है पर ये कोई गला का कैंसर नही है। पर इसके साथ कोई और लक्षण भी दिखाई देता है तो हमे थोड़ा सा ध्यान देने की ज़रूरत है। जैसे वजन कम होना, ज़्यादा इडिटेशन होना, आवाज का बदलना, मुँह से खून आना, छाले बार बार होना तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

कौन सी जाँच करवाना चाहिए – गले का कैंसर की पहचान

  1. इसमें सिटी स्केन की टेस्ट के लिए कहा जाता है।
  2. इसके अलावा आपको थाइरॉइड से रिलेडेड अगर आपको कोई समस्या है तो (TFT) थाइरॉइड फंक्शन टेस्ट और थाइरॉइड का अल्ट्रासाउण्ड भी किया जा सकता है
  3. अगर सर्वाइवल की बात करे तो पहली स्टेज पर है तो 95 % सर्वाइवल रेट है। इसके अलावा अगर मरीज चौथे स्टेज पर है तो इसकी सर्वाइवल रेट बहुत कम हो जाती है 5 से 6 % रेट तक हो जाती है। तो ऐसे कंडीशन में हमे जल्दी से जल्दी इसका पता लगाना चाहिए की आपको ये लक्षण देखने को मिल रहे है। तो पहले से अपने डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

गले का कैंसर की पहचान – ट्रीटमेंट की बात करे तो इसमें तीन तरह के ट्रीटमेंट होते है।

एक होता है – मेडिशनल
दूसरा दूसरा होता है – सर्जरीकल 
तीसरा होता है – कीमोथैरेपी
चौथा होता है – रेडिएशन

ये डिपेंड करता है की मरीज किस स्टेज पर है। और उसका कैंसर किस तरह से हुवा था, उसका कारण क्या है और उस मरीज को कैंसर कहा कहा पर फैल रहा है। ये अलग अलग तरीके होते है इनके इलाज करने के। ये पूरी तरह से रोकथाम पर निर्भर करता है की मरीज किस स्टेज पर है। अगर मरीज पहली स्टेज पर है तो उसको हम आसान तरीके से ठीक कर सकते है। वरना चौथी स्टेज पर हो तो मरीज को ठीक करना बहुत मुश्किल हो जाता है। क्युकि काफी ज़्यादा ये फैल चूका होता है।

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